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Wednesday, 11 March 2026

सुरह हम्द

 

नबी अकरमﷺ के इरशाद के मुताबिक़ सूरा हम्द उम्मुल किताब है। 

एक मर्तबा जाबिर बिन अबदुल्लाह अंसारी आँहज़रतﷺकी ख़िदमत में हाज़िर हुए तो आपﷺने फ़रमाया

"क्या तुम्हें सबसे फ़ज़ीलत वाली सूरत की तालीम दूं जो ख़ुदा ने अपनी किताब में नाज़िल फ़रमाई है?" 

जाबिर ने अर्ज़ किया "जी हाँ मेरे माँ बाप आप पर क़ुर्बान हूँ, मुझे उस की तालीम दीजिए"। 

आँहज़रतﷺ ने सूरा हमद जो उम्मुल किताब है उन्हें तालीम फ़रमाई और ये भी इरशाद फ़रमाया कि सूरा हमद मौत के इलावा हर बीमारी के लिए शिफ़ा-ए-है। 

(हवाला: मजमउल बयान, नूरूस सकलेन, आग़ाज़ सूरा हम्द )

इस सूरत में ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने से इस की वजह मालूम होती है । हक़ीक़त में ये सूरा पूरे क़ुरआन के मज़ामीन की फ़हरिस्त है। 

इस का एक हिस्सा तौहीद और सिफ़ाते ख़ुदावंदी से मुताल्लिक़ है, 

दूसरा हिस्सा क़ियामत-ओ-मुआद से गुफ़्तगु करता है 

और तीसरा हिस्सा हिदायत-ओ-गुमराही को बयान करता है जो मोमिनीन-ओ-कुफ़्फ़ार में हद-ए-फ़ासिल है। 

इस सूरा में परवरदिगार आलम की हाकिमीयत मुतल्लक़ा ओ मकामें रबूबियत का बयान है। 

और उस की लामतनाही नेअमतों की तरफ़ इशारा है जिनके दो हिस्से हैं, एक उमूमी और दूसरा ख़ुसूसी (रहमानियत और रहीमीयत) इस में इबादतो बंदगी की तरफ़ भी इशारा है जो इसी ज़ाते पाक के लिए मख़सूस है। 

हक़ीक़त ये है कि इस सूरा में तौहीदे ज़ात, तौहीदे सिफ़ात, तौहीदे अफ़आल और तौहीदे इबादत सबको बयान किया गया है।