Tuesday, 17 February 2026

सुरह जिन्न - पढ़ने के फायदे

सूराह जिन्न मक्का में नाजिल हुआ और बिसमिल्लाह मिला कर २९ आयात हैं।
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) से रिवायत है जो शख़्स इस सूराह  को कसरत से पड़ेगा उस को दुनिया में क़ौम जिनकी आँख, सांस और जादू से कोई तकलीफ़ ना पहुँचेगी और वह हज़रत मुहम्मद (स.अ.) की हम-राही मैं मह्शूर होगा।

    हुज़ूर (स.अ.) से मनक़ूल है कि जो इस सूराह को पढ़े, तमाम क़ौमें जिन्नात की तादाद के बराबर उस को अज्र मिलेगा और क़ौम जिनो के शर से महफ़ूज़ रहेगा।
जाबिर सुलतान की तरफ़ जाते हुए इस को पढ़
ले तो वो उस के शर से महफ़ूज़ रहेगा।
अगर इसको कोई क़ैदी पढ़े तो जल्द आज़ाद होगा।
इस को हमेशा पढ़ने वाले तंगी और तंगदस्ती से महफ़ूज़ होंगे। (तफ़सीर बुरहान)
मिसबाह कफ़ामी से मनक़ूल है जो शख़्स से है जो शख़्स उस को लिख कर पिए तो उस का हाफ़िज़ा अच्छा होगा।
जिससे मुनाज़रा करेगा उस पर ग़ालिब होगा।
यह सूरा जहां पढ़ा जाये तो जिननात भाग जाते हैं।
इस का पढ़ना हाकिम से अमान का सबब है।
ख़ज़ाना की हिफ़ाज़त होगी ।
क़ैदी की रिहाई का वसीला है।
और क़र्ज़ की अदायगी का ज़रीया है। 
(फ़वाइद उल-क़ुरआन)